वापू के स्वप्न में छुपा है हर व्यक्ति के करोड़ पति बनने का राज
वापू के स्वप्न में छुपा है हर व्यक्ति के करोड़ पति बनने का राज
-जब शास्त्री के नारे को मिलेगा सम्मान और हर व्यक्ति को मिलेगा काम तो देश के विकास को निश्चित तौर पर मिलेगा बल वही होगा देश का आत्मबल
अच्छे दिनों को लेकर देश और आमजन में गहरी चर्चा है, लेकिन अभी तक अच्छे दिन आए हैं या नहीं ?, आएंगे या नहीं ?, आ सकते हैं या नहीं ? इन बिंदुओं पर शायद कम ही लोग चर्चा में शामिल हैं। जबकि मोहनदास कर्मचंद गांधी यानि राष्ट्रपिता का सपना था कि हर हाथ को काम और हर पेट को रोटी हो। सच मायने में जब तक वापू का यह सपना पूरा नहीं होगा तो अच्छे दिन आने वाले नहीं है। अच्छे दिनों की चर्चाएं तो होती रहेंगी, लेकिन अच्छे दिन तभी आएंगे जब वापू का सपना पूरा होगा।
वापू के स्वप्न पर टिके हैं देश के अच्छे दिन
अगर देश में अच्छे दिन लाने हैं तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्वप्न पूरा करना ही होगा। वापू का स्वप्न
यानि हर हाथ को काम और हर पेट को रोटी। सोचिए क्या यह स्वप्न आसानी से पूरा हो सकता है। अगर हो सकता तो अब तक देश में कई सत्ता परिवर्तन हुए चर्चाओं को तूल मिली और सत्ता में पहुंचते ही चर्चाओं पर विराम लग गया। यानि वापू का स्वप्न केवल सपनों में ही सिमट कर रह गया है। जब कि यह सत्य है कि जब तक वापू का स्वप्न पूरा नहीं होगा देश में अच्छे दिन शायद नहीं आ सकते।
कैस हो वापू का सपना पूरा ?
यक्ष प्रश्न है कि वापू यानि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा देखा गया सपना यानि ‘‘हर हाथ को काम और हर पेट को रोटी’’ कैसे संभव हो पाएगी। इस पर गहन चिंतन और मनन की आवश्यकता है। अगर पुरातन राजनीति को उठा कर देखें तो सरकारों ने प्रयास तो किए, लेकिन वह प्रयास इसलिए सार्थक नहीं हो सके कि हर किसी को जॉब चाहिए। कोई भी जिम्मेदारी लेना नहीं चाहता है। देश तो आजाद हुआ, लेकिन दिमाग में घुसी गुलामी अभी तक नहीं निकल पा रही है। एक पुरानी कहावत है कि ‘‘नौकरी क्यों करी, गर्ज पड़ी त्यों करी’’ अन्यथा सोच नौकरी पाने की नहीं बल्कि सहयोग देने की होनी चाहिए। वापू का स्वप्न पूरा करना है तो पहले नौकरी की लत छुड़ानी होगी और पूर्व प्रधानमंत्री स्व.लाल बादुर शास्त्री जी के नारे को बल देना होगा।
क्या था लालबाहदुर शास्त्री का नाराः-
पूर्व प्रधानमंत्री स्व.लालबहादुर शास्त्री जी का नारा था ‘‘जय जवान, जय किसान’’ अर्थात जिस देश में किसान यानि अन्नदाता की की पूजा होती है, सम्मान मिलता है वह देश उन्नति के पथ पर अग्रसर हो जाता है उत्पादन बढ़ता है और बढ़ते उत्पादन से पैदा होते विकास की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका होती है ‘‘जवान’’ की क्योंकि वह पूरे देश की सुरक्षा में अपनी अहम भूमिका निभाता है और फिर विकास होता है व्यापार का अर्थात बिजनेस का। जिस देश में हर व्यक्ति व्यापार करेगा अर्थात अपनी दुकान चलाएगा वहां पर उन्नति के पहिए को कोई रोक नहीं सकता है और होगा वापू का स्वप्न साकार, लेकिन प्रश्न यह उठता है कि हर व्यक्ति कैसे बने का व्यापारी।
देश में हर व्यक्ति कैसे बने का बिजनेस मैन
पहले तो देश में हर व्यक्ति को व्यापारी बनाने की सोच ही नहीं सकता था, लेकिन आज ‘‘डायरेक्ट सेलिंग’’ यानि नेटवर्किंग मार्केटिंग (एमएलएम) ने उसको भी झुठला दिया है और वापू के स्वप्न को साकार करने पूरा का पूरा आधार बनाकर। आज भारत में हर व्यक्ति तो नहीं, लेकिन डायरेक्ट सेलिंग की बढ़ती प्रवृत्ति और बदलती सोच बहुत कुछ आपू के स्वप्न की ओर बढ़ रही है। इसका जीता जागता प्रमाण हैं यह डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां जैसे आरसीएम, मोदीकेयर, वेस्टीज व हर्बलधारा आदि जो शुद्ध उत्पादों के साथ लोगों को नेटवर्किंग से जोड़ रही हैं। इन कंपनियों ने एक नहीं देश को हजारों करोड़ पति दे दिए तो करोड़ों लखपति बना दिए। अगर डायरेक्ट सेलिंग की इसी प्रकार से गति विकसित होती रही तो वह दिन दूर नहीं जब वापू तो नहीं होंगे, लेकिन वापू का स्वप्न साकार हो जाएगा और देश पर चल रहा अरबों का कर्ज भी निवट जाएगा और हर व्यक्ति सुखी और संपन्न हो जाएगा।
संजय दीक्षित
8630588789



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